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लालची चिड़िया:
लालची चिड़िया: हुत समय पहले की बात है, मगध देश के पास एक बहुत व्यस्त राजमार्ग (Highway) गुजरता था। उस रास्ते से रोज़ाना बैलगाड़ियां और बड़े-बड़े रथ अनाज की बोरियां लादकर शहर की मंडी की ओर जाते थे। रास्ते में अक्सर बोरियों से चावल, मूंग और अरहर के दाने गिरते रहते थे।
उस इलाके में एक छोटी सी भूरे रंग की चिड़िया (Bird) रहती थी, जिसका नाम था 'चिंकी'। चिंकी बहुत चतुर थी, लेकिन उसमें एक बहुत बुरी आदत थी - लालच। उसे मुफ्त का खाना बहुत पसंद था। उसने देखा कि राजमार्ग पर तो अनाज का भंडार बिखरा पड़ा रहता है। वह रोज़ वहां जाती और जी भरकर मनपसंद दाना चुगती।
लालच का बीज और झूठी अफवाह
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कुछ दिन तो सब ठीक चला, लेकिन धीरे-धीरे चिंकी के मन में स्वार्थ जागने लगा। उसने सोचा, "यह जगह तो स्वर्ग है! यहाँ इतना सारा दाना है। अगर जंगल के बाकी पक्षियों को इस जगह का पता चल गया, तो वे भी यहाँ आ जाएंगे और फिर मेरे हिस्से में कम दाना आएगा। मुझे कुछ तरकीब लगानी होगी ताकि यह पूरा खजाना सिर्फ मेरा रहे।"
चिंकी ने एक बहुत ही शातिर योजना बनाई। वह वापस जंगल में गई और सभी पक्षियों को इकट्ठा किया। उसने बहुत ही डरावना चेहरा बनाया और बोली, "भाइयो और बहनों! मैं तुम सबको एक चेतावनी देने आई हूँ। उस राजमार्ग की तरफ भूलकर भी मत जाना। वह मृत्यु का मार्ग है!"
दूसरे पक्षियों ने डरते हुए पूछा, "क्यों चिंकी बहन? वहां क्या है?"
चिंकी ने झूठ बोलते हुए कहा, "अरे! वहां से बड़े-बड़े जंगली हाथी और पागल बैलगाड़ियां गुजरती हैं। वे इतनी तेज़ होती हैं कि उड़ने का मौका भी नहीं मिलता। वहां हवा भी ज़हरीली है। जो भी वहां गया, वह कभी वापस नहीं आया। मैं तो बड़ी मुश्किल से जान बचाकर आई हूँ।"
चिंकी की बातों में इतना डर था कि भोले-भाले पक्षियों ने उसकी बात मान ली। उन्होंने उसे बहुत समझदार माना और उसका नाम 'चेतावनी देवी' रख दिया। अब कोई भी पक्षी राजमार्ग की तरफ नहीं देखता था।
बेखौफ दावत और लापरवाही
अब चिंकी चिड़िया बहुत खुश थी। पूरा राजमार्ग और वहां बिखरा अनाज सिर्फ उसका था। उसका कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं था। वह रोज़ सुबह मजे से राजमार्ग पर जाती और घंटों तक दाना चुगती रहती। अकेले खाते-खाते वह बहुत मोटी और सुस्त हो गई थी। उसे लगने लगा था कि वह सबसे होशियार है और कोई भी गाड़ी उसे नुकसान नहीं पहुँचा सकती क्योंकि वह तो उड़ सकती है।
लेकिन हिंदी कहानियां हमें सिखाती हैं कि अति-आत्मविश्वास (Overconfidence) हमेशा विनाश का कारण बनता है। चिंकी यह भूल गई थी कि जिन खतरों का डर उसने दूसरों को दिखाया था, वे खतरे असल में वहां मौजूद थे।
अंत का क्षण
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एक दोपहर, चिंकी राजमार्ग के बीचों-बीच बैठकर चावल के दाने चुगने में मग्न थी। उसे अनाज इतना स्वादिष्ट लग रहा था कि उसका ध्यान आसपास की आवाज़ों से हट गया था। तभी दूर से एक तेज़ रफ्तार रथ (गाड़ी) धूल उड़ाता हुआ आ रहा था। रथ के पहियों की गड़गड़ाहट बहुत तेज़ थी।
चिंकी ने आवाज़ सुनी और पीछे मुड़कर देखा। उसने अपने मन में सोचा, "अरे, अभी तो यह गाड़ी बहुत दूर है। मैं तो उड़ने में माहिर हूँ। दो-चार दाने और खा लेती हूँ, फिर उड़ जाऊंगी।" यही उसकी सबसे बड़ी गलती थी। लालच ने उसकी बुद्धि को ढक दिया था। वह दोबारा दाना चुगने में लग गई।
गाड़ी की रफ्तार उससे कहीं ज्यादा तेज़ थी। जब तक चिंकी ने दोबारा सिर उठाया, रथ का विशाल पहिया उसके सिर पर आ चुका था। चिंकी ने उड़ने के लिए पंख फड़फड़ाए, लेकिन उसका भारी शरीर और देरी उसे ले डूबी। कुचल! एक ही पल में वह लालची चिड़िया उस गाड़ी के पहिए के नीचे आ गई और वहीं ढेर हो गई।
भेद खुला
शाम हो गई, लेकिन 'चेतावनी देवी' (चिंकी) जंगल वापस नहीं लौटी। पक्षियों में खलबली मच गई। "हमारी रक्षक चिंकी कहां गई? कहीं वह किसी मुसीबत में तो नहीं?" एक कबूतर ने कहा। चिंता के मारे कुछ साहसी पक्षी डरते-डरते राजमार्ग की ओर गए। वहां का नज़ारा देखकर वे सन्न रह गए।
सड़क के बीचों-बीच चिंकी मरी पड़ी थी और उसके आसपास अनाज बिखरा था। एक बुजुर्ग कौवे ने कहा, "देखो दोस्तों! यह हमें तो यहाँ आने से रोकती थी, खतरे बताती थी, लेकिन खुद लालच में यहीं दाना चुगने आती थी। इसने हमें धोखा दिया और खुद अपने ही जाल में फंस गई।"
सभी पक्षियों को समझ आ गया कि जो दूसरों को नियम सिखाता है लेकिन खुद पालन नहीं करता, उसका अंत ऐसा ही होता है।
इस कहानी से सीख (Moral of the Story):
उपदेश और आचरण: जो लोग दूसरों को ज्ञान देते हैं लेकिन खुद उस पर अमल नहीं करते, वे हंसी के पात्र बनते हैं और मुसीबत में पड़ते हैं।
लालच बुरी बला है: चिंकी का लालच ही उसकी मौत का कारण बना।
सावधानी हटी, दुर्घटना घटी: कभी भी खतरों को हल्का नहीं समझना चाहिए।
Tags: Jataka Tales in Hindi, Greed Stories, Bird Stories, Kids Moral Stories, Lotpot Kahaniya
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